आर के पाण्डेय एडिटर इन चीफ बैज़लपुर उत्तर प्रदेश / Fri, Jun 12, 2026 / Post views : 51
साध्वी रितंबरा जी की जीवन कहानी
साध्वी ऋतम्भरा एक प्रसिद्ध हिंदू साध्वी, प्रवचनकर्ता, लेखिका और समाजसेविका हैं। उनका जन्म 2 जनवरी 1964 को पंजाब के लुधियाना जिले के दोराहा में एक साधारण हिंदू परिवार में हुआ था। उनके बचपन का समय पारिवारिक संस्कार, धार्मिक आस्था और नैतिक मूल्यों के बीच बीता, जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
साध्वी ऋतम्भरा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही वक्तृत्व कला, विचारशीलता और आत्मानुशासन के गुण विकसित करने शुरू कर दिए थे। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों, दर्शन और भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया, जिससे उनके वैचारिक व्यक्तित्व को आकार मिला। वेद, उपनिषद, गीता, रामकथा और संत साहित्य ने उनकी सोच और जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ¹।
संन्यास और आध्यात्मिक मार्ग
युवावस्था में साध्वी ऋतम्भरा ने संन्यास का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया और स्वयं को पूर्णतः धर्म, साधना और सेवा के लिए समर्पित कर दिया। संन्यास के बाद उनका जीवन कठोर अनुशासन, तप, अध्ययन और आत्मसंयम से युक्त हो गया। उन्होंने विभिन्न आश्रमों और संतों के सान्निध्य में रहकर आध्यात्मिक जीवन की गहराई को समझने का अवसर प्राप्त किया।
समाज सेवा और राम जन्मभूमि आंदोलन
साध्वी ऋतम्भरा ने अपने जीवन को समाज सेवा और राष्ट्रभाव के लिए समर्पित किया। उन्होंने वात्सल्य ग्राम जैसे प्रकल्पों के माध्यम से अनाथ बच्चों को परिवार देने का काम किया। इसके अलावा, उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने भाषणों के माध्यम से हिंदू समाज को जागरूक किया। आजकल भी वे प्रवचन और सामाजिक चेतना के कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं ² ¹।
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